कुंभलगढ़ किला
दोस्तों आप ने बहुत किलोंके बारे मैं सुना होगा लेकिन हम आज आप को बताने वाले हैं कुंभलगढ़ किले के बारे में ओर साथ ही साथ बताने वाले है इसके इतिहास से जुड़े कुछ रोचक तथ्य के बारे मैं कुंभलगढ़ किला मेवाड़ के प्रसिद्ध किलो में से एक है जो अरावली पर्वत पर स्थित है यह किला राजस्थान के उदयपुर जिले के राजसमंद में स्थित है इस का निर्माण15वी सताब्दी में राणा कुंभा ने किया था कुंभलगढ़ महान शासक महाराणा प्रताप की जन्म भूमि भी रहा है आप ने द ग्रेट फॉल चाइना के बारे में तो सुना होगा जिसको विश्व की सबसे बड़ी दीवार होने का खिताब हासिल है क्या आप को पता है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दिवार भारत में स्थित है जी हा दोस्तों राजस्थान के राजसमंद में स्थित कुंभलगढ़ की दीवार36 किलोमीटर लम्बी तथा15फिट चौड़ी है इस फोर्ट का निर्माण महाराणा कुंभा ने करवाया था यह दुर्ग समुद्र की सतह से 1100किलोमीटर की ऊचाई पर बना हुआ है इसका निर्माण सम्राट अशोक के दूसरे पुत्र समवती के बनाए अवसहसो पर किया गया था इसके पूण निर्माण में 15 साल लगे थे दुर्ग का निर्माण पूण होने पर महाराणा कुंभा ने सिक्के बनवाने थे जिम पर दुर्ग का नाम अंकित है दुर्ग पर कई घटियों को मिलाकर बनाया गया है इस दुर्ग पर उचे स्थानों पर महल मन्दिर बनाये गए है इस दुर्ग के भीतर एक ओर गड़ है जिसे कटारगढ़ के नाम से भी जाना जाता हैं महाराणा प्रताप की जन्म स्थली कुंभलगढ़ का किला एक तरह से मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी रहा है महाराणा कुम्भा से लेकर महाराणा राजसिंह के समय राजपरिवार इस ही दुर्ग में रहा इस ही दुर्ग में पृथ्वीराज ओर महाराणा प्रताप का बचपन बीता। महाराणा उदयसिंह को भी पन्ना दाय ने छुपा कर पालन पोषण किया था हल्दीघाटी का युद्ध हारने के बाद महाराणा प्रताप ज्यादातर समय यह ही बिताया था इसके निर्माण की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है1443 में राणा कुंभा ने इस दुर्ग का निर्माण किया था कार्य आगे नही बड़ पाया निर्माण कार्य में बहुत ही अड़चन आने लगी थी राजा इस बात पर बहुत ही चिन्तित हो गए थेउन्होंने एक सन्त को बुलाया था सन्त ने बताया कि यह काम तब ही आगे बढ़ेगा जब कोई अपनी इच्छा अनुसार इस किले पर बलि देगा तो राजा ने इस बात पर चन्तित होकर सोचने लगे कि कोन इस के लिये आगे आयेगा तबी सन्त ने कहा कि वे इस बलिदान के लिए तेयार है ओर इस के लिए राजा ने आज्ञा मांगी सन्त ने कहा कि उन्हें पहाड़ी पर चलने दिया जाए ओर जहां वे रुके वहीं उन्हें मार दिया जाए तो ऐसा ही हुआ वे 36 किलोमीटर चलने के बाद रुक गया ओर उस का सिर धड़ से अलग कर दिया गया जहाँ पर उस का सिर गिरा वहा मुख्य द्वार हनुमान पोल है ओर जहा पर उसका शरीर गिरा वहां दूसरा द्वार है महाराणा कुम्भा के रियासत में कुल 84 जिले आते है इस किले की दीवार इतनी चोड़ी है कि यहां पर एक साथ 8गोड़े दौड़ सकते है इस दुर्ग के बनने के बाद इस पर आक्रमण शुरू हो गए लेकिन एक बार को छोड़ कर ये दुर्ग प्राय अजेय रहा है
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