उदयपुर किला
इस विश्व प्रसिद्ध अदभुत महल का निर्माण लगभग400वर्ष पहले महाराणा उदयसिंग द्वितीय ओर उनके उत्तराधिकारी द्वारा किया था वर्ष 1537 ई में महाराणा उदयसिंग उदयसिंग द्वितिय ने चित्तोड़ में मेवाड़ साम्राज्य की स्थापना की थी परन्तु उस समय उनके पहले किलो को मुगलो के हाथ मे जाता देखना पड़ रहा था इसीलिए उन्होने बाद में झील के पास एक स्थान को चुना जो कि वनों झीलों ओर अरावली पहाड़ियों द्वारा अच्छी तरह से संरक्षित था वर्ष 1572 ई में उदयसिंग की मौत के बाद उनके बेटे महाराणा प्रताप ने उदयपुर की सत्ता को समाला हालांकि 1576 ई में हल्दीघाटी के युद्ध मे मुगल सम्राट अकबर से पराजित हो गए जिससे इसके बाद उदयपुर पर मुगलो का शासन चलने लगा था अकबर की मौत के बाद मेवाड़ को महाराणा प्रताप के पुत्र अमरसिंह प्रथम को जहागीर ने वापस दे दिया था वर्ष 1761 के बाद मराठो के हमले के उदयपुर में साक्षय आज भी वह के खण्डरों में देखें जाते है 18 वी सताब्दी में यह किला ओर छेत्र अंग्रेजों के अधीन आ गया था जिससे स्वतन्त्रता के बाद भारत में मिला लिया गया था तो चलिए आज हम जानते है सिटी पैलेस उदयपुर के बारे में कुछ रोचक तथ्य इस विश्व प्रसिद्ध महल का निर्माण कार्य 16 सताब्दी में मेवाड़ दे प्रसिद्ध शासक उदयसिंग द्वितिय द्वारा सुरु किया गया था जिसे बाद में राजा के पुत्र महाराणा प्रताप ने पूरा करवाया था इस महल पर की समराज्यो के शासकों ने हमला किया था जिया कारण वर्ष 1818 ई में यहां के शासक ने मराठो के बढ़ते आक्रमण को देखकर यह किला अंग्रेजों के साथ सन्धि कर उन्हें सोप दिया था 1948 आस पास भारत मे फिर से मिला लिया यह महल भारत सबसे ऊचे ओर विशाल काय महलो में से एक है इस महल को 598 ऊँचे पठार पे बनाया गया था यह लगभग244 मीटर लम्बा ओर30पॉइंट4मीटर उचा है इस महल का निर्माण 1559 ई में मेवाड़ के प्रसिद्ध सिसोदिया शासको ने करवाया था इस महल का निर्माण लगभग76 से अधिक पीढ़ियों ने करवाया था इस महल के निर्माण में प्रमुख योगदान उदयसिंग द्वितीय ने दिया था जिन्होंने इसके भीतर ओर11 छोटे छोटे अलग महलो का निर्माण करवाया था इस महल में स्तित द्वारो को पोल कहा जाता था ईस महल का सबसे बड़ा द्वार बड़ी पोल है जो इस महल के विशाल आनन्द की ओर जाता है इस महल में सिथित अन्य प्रमुख द्वारो में त्रिपोलिया पोल है जो कि तीन मेहरा द्वारो द्वारा मिश्रण है इस का निर्माण1725 ई में करवाया गया था इस महल के अंदर सर्वोच्च प्रांगण इनका अमर विलास महल है जो असल मे एक उचा बगीचा है जो वर्गाकार में बनाया गया है जिसमे संगमरमर के ठगों का भी उपयोग किया गया था यह मुगल शेली में एक आनन्द मण्डप के रूप में बनाया गया था इस महल के भीतर बड़ी महल यानी कि ग्रेट पैलेस भी है जिसे गार्डन पैलेस भी कहा जाता हैं वह एक27मीटर उची प्राकृतिक चटान के केंद्रीय महल में बनाया गया है यह महल बहु मंजिल है अथवा एक जगदीश महल स्वीमिंगपूल इत्यादि चीजे है इस महल परिसर में भीम विलास एक गेलरी है जिसमे लघु चित्ररो का जो राधा कृष्ण की कहानियों को दर्षाते है इस महल मव सिथित चीनी चित्रकला चीनी ओर डग सजावट के लिए यहां पर दरसाई जाती है इस महल के परिसर में स्थित दिलकुशा महल यानी कि जॉय महल भारत के सबसे खूबसूरत महलो में से एक है जिसका निर्माण1620 ई में किया गया था दरबार होल को 199ई में फ़ते प्रकाश महल के भीतर राजयभोज ओर बैठकों जैसे अधिकारी कार्यो के लिये एक स्थान के रूप मे बनाया गया था इस महल के परिसर में फ्तेप्रकास महल जो अब लग्जरी होटल है इसमे किर्स्टल गेलरी है इसमे क्रिस्टल कुर्सियां सोफा टेबल आदि शामिल है जिनका उपयोग कभी भी नहीं किया गया फ्तेप्रकास पैलेस में सिथित वस्तुओं का आदेश महाराणा सज्जन सिंह ने वर्ष1873 में लन्दन से एफ एन सी ओसलर कम्पनी को दिया था जिसके तुरंत बाद उनकी मर्त हो गई जिसके बाद इन वस्तुओं को 110 कसो तक उपयोग में नहीं किया था इस महल में सिथित मोर चोक मोर वर्ग महल इस कि सबसे प्रमुख संरचना है क्योंकि इस मे मोरो कि मूर्तियों को 5000 से ज्यादा टुकड़ों से बनाया गया था जो हर सोने ओर नीले रंग में चमकते है इस महल में सीस महल का निर्माण महाराणा प्रताप की पत्नी अजाबदे के लिए करवाया था वर्ष 1974 ई में इस महल परिसर में सबसे सुंदर महलो में से एक जनना महल को एक संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया था इस महल परिसर के भीतर कई महल स्तित है जिसमें क्रष्ण विलास रँगभवन महल लछमी विलास ओर मानक महल जैसी प्रमुख संरचनायें प्रमुख हैं
Comments
Post a Comment