बून्दी का किला
बून्दी का किला अरावली पर्वत श्रखला के सबसे ऊंची पहाड़ियों में से एक नाग पहाड़ी पर स्थिति एक भेहद अकर्षक ओर सक्तिसलि किला है इस किले का निर्माण बून्दी के संस्थापक राव जेहड़ा ने करवाया था सदियों पुराने इस किले को देखने आज भी देसी व विदेशी पर्यटक लाखो की सँख्या में आते है इस किले का निर्माण शत्रुओ की दृष्टि से बचाने के लिए बेहद मजबुती के साथ करवाया था जिस वजन से इस किले को सबसे सुरक्षित किलो में गिना जाता है किले को बनवाने के लिए पहाड़ी पर सबसे ऊपरी सतह पर किले का निर्माण किया गया था जिससे दुश्मनों के लिए किले पर हमला करवाना भेहद मुश्किल हो जाता है लेकिन बून्दी का यह किला वक्त की मार न झेल सका भारत का यह किला सबसे प्राचीन किला है बून्दी सहर को भी एक खास सहर बनाने में भी इस दुर्ग का खास योगदान है इस किले के कारण बून्दी एक पर्यटन सहर बन गया है राजा महाराजाओ की सानो सौकत ओर सम्रद्ध रियासत के गवाह यह पुराना यह किला अब वरदावस्ता में है लेकिन फिर भी यह किला मिट्टी के ढेर पे पड़े सोने के मूल्यवान वस्तु जैसे आज भी खड़ा है वर्तमान समय में भी हरि भरी पहाडियो ओर जंगली इलाके से खड़ा है यह किला कोटा से लगभग39 किलोमीटर दूरी पर बसा है इस सानदार किले का निर्माण1354 ई में हुआ था पहाड़ी की ढलान पर बसे इस दुर्ग में तीन विसाल द्वार बने हुए हैं जिन्हें लक्ष्मी पोल फूटा दरवाजा ओर गवडी फाटक के नाम से जाना जाता है चौदवीं सदी में बने इस विशालकाय दरवाजे में अब दरारे पड़ने लगी है किले का अधिकांश भाग पर दरारे पड़ने लगी हैप्राचीन काल मे यह किला अपनी गुप्त सुरंगों के लिए प्रसिद्ध था लेकिन अब यह सुरंगे बन्द हो चुकी है ओर बिना नक्से के इन सुरंगों को ढूंढ पाना काफी मुश्किल है भीम बुरड़ कर गर्व नामक ऐसी तोप रखी हुई है जो शत्रुओ के चके छुड़ा देती थी इसकी मारक छमता काफी ज्यादा थी जिस वजह से शत्रु इस के सामने टिक नहीं पाते थे आज भी यह तोप यहां रखी हुई हैं लेकिन वर्तमान समय में यह सिर्फ प्रदर्शन की वस्तु बन कर रह गई है कहा जाता हैं जब यह तोप चलती थी तो इस कि भयानक गर्जना से आसमान भी गुज उठता था इस वजह से इस तोप ला नाम गर्व गुंजन तोप पड़ा था इस दुर्ग से बून्दी शहर का सानदार नजारा दिखाई देता है किले में बना चौहान गढ़ अपने विशाल जलासय के कारण प्रसिद है इतनी ऊचाई पर किले पर जलासय होना किले की खूबसूरती को बड़ा देता है यह उस समय की अपनाई जाने वाली वोटर हार्वेस्टिंग प्रणाली का सबसे अच्छा उदाहरण है इस विशाल जलासय में बारिश के पानी को जमा किया जाता था और पानी की कमी होने पर प्रजा इस पानी का इस्तेमाल करती थी जलासय का आकार पथरीला होने के कारण पानी सदाबहार इकठा रहता था किले के परिसर में रानी महल एक छोटा ओर खूबसूरत महल है जो राजाओ के रानी या प्रेमिका के रहने के काम आता था यह खूबसूरत महल काच की बनी खिड़कियों के कारण प्रसिद्ध हैं लेकिन रख रखवा के कारण काच के रंग फीके पड़ गए हैं परिसर में ही मिरान साहब की दरगाह भी है मिरान साहब बून्दी किले में एक वफादार सिपाई थे एक युद्ध के दौरान उन्होंने दुर्ग की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दे दी थीं दुर्ग के रास्ते मे ही सबसे सक्तिसलि राजा पृथ्वीराज चौहान का इस्मार्क भी बना हुआ है इस स्मार्क का निर्माण चौहान वंश को सम्मान देने के लिए कराया गया था इस इस्मार्क को सप्ताह के सातो दिन 9 बजे से देखा जा सकता है विभिन्न शाशको ने इस दुर्ग पर साशन किया राजस्थान के अन्य किलो की तुलना में इस दुर्ग पर मुगल स्थापत्यकला का नमूना देखने को नहीं मिलता है यह किला ठेठ राजपूती स्थापत्य कला से बना हुआ है कई जगह पर दरसाय हाती ओर कमल के फूल राजपूती स्थापत्यकला के प्रतीक हैं एक खास बात ओर है जो इसे राजस्थान के अन्य किलो कि तुलना में अलग दरसाथि है राजस्थान के ज्यादातर किलो में बलुवा पथर का इस्तेमाल किया गया है जबकि इस किले में बलुआ पथर का उपयोग किले के आंतरिक हिस्से में किया गया था महल के द्वार पर बने विशाल हाथियों की जोड़ी भी पर्यटकों को आकर्षित करती है
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