अलवर का किला

हमारे भारत देश मे  विसाल किले ओर इस्मार्क बने हुए हैं आज हम जिस किले के बारे में बात कर रहे हैं वो है अलवर का बाला किला यह किला राजस्थान के अलवर शहर में स्थिति है बाला किला अलवर जिले के प्रमुख टूरिस्टों में से एक हैं इस किले को अलवर का किला भी कहा जाता है बाला किले का निर्माण 15 वी सदी में हसन खान मेंवाती द्वारा किया गया था यह किला अलवर शहर के ऊपर अरावली रेंज में स्थित हैं इस किले की सबसे खास बात यह है कि इस किले पर मराठो यादवो ओर कछवा राजपूतो का शासन भी रहा है यहां पर लचमनपोल न से सड़क है जो बाला किले को अलवर शहर से जोड़ती है इतिहास की माने तो अलवर राज्य का संस्थापक प्रताप सींघ जी ने इस ही धातु के रास्ते से प्रवेश किया था इस किले में6 द्वार है जिनके नाम जय पोल सूरज पोल लक्मणपोल चांद पोल क्रष्ण पोल ओर अंदेरी गेट है बाला किले की इतिहास की बात करे तो बता दे कि उस समय इस किले का उपयोग मुगलो ने रणथंभौर पर हमला करने के आधार पर किया था 775 ई में कछवाहा राजपूत प्रताप सिंह जी ने किले पर कब्जा कर लिया था ओर595 मीटर की दूरी पर पथर बिछा दिये थे यह किला अलवर शहर से बहुत बड़ा ओर साफ दिखाई देता है क्योंकि यह 300मीटर ऊँची चट्टान पर बस है यह किला इतना विशाल है कि उत्तर से दछिन तक 5 किलामीटर पूव से पछिम तक डेढ़ किलोमीटर तक फैला है यह सभी गेट राजपूतो की वीरता ओर सत्यता की बात करते है किले की दीवारों को प्राचिन सास्त्र ओर मूर्तियों के साथ बारीक रूप दिया है बाला किले की एक एक चीज इसके इतिहास के बारे में बताती है बाला किला हिन्दू इस्लामीक शैली का एक वास्तुशिल्प टुकड़ा है इस किले की दीवारों को खूबसूरती ओर बारीकी से सजाया गया है जो आप को सुनहरे में ले जाती हैं इस किले में 6 द्वार है जिनमे से प्रत्येक द्वार का नाम एक सासक के नाम पर पड़ा है इस किले की दीवारों पर सुंदर नकासी के द्वारा कई ऐसी चिजे भी है जो टूरिस्टों को आकर्षित करती है इस किले के प्रमुख अकरसनो में जय महल कुंभ महल स्लिम सागर तालाब ससलीम सागर तालाब सूरज कुंड सामिल है किले में 15 मंदिर भी स्थित है जिनमे से कुछ प्रमुख सीताराम मन्दिर हनुमानजी मन्दिर ओर करधरी मन्दिर है किले में बन्दूक चलाने के।लिए छेद वर्तमान समय मे बीते युग की भव्यता को दर्षाते है जिस जगह पर सलीम यानी जहागीर निर्वासन के समय3 साल तक रहा था उस जगह को सलीम महल के नाम से जाना जाता हैं इन सभी अकरसनो के अलावा किले में।एक स्टेसन हैं जिसे टूरिस्ट केवल अलवर पुलिस अधीक्षक की अनुमति से देख सकते है बाला किला वास्तु कला ओर इतिहास प्रमियों के लिए प्रसिद्ध है अगर आप भी इतिहास प्रमी है आप को भी बाला किले की यात्रा जरूर करनी चाहिए बाला किला सुबह9 बजे खुलता है सैम को 6 बजे बन्द हो जाता है बाला किला देखने के लिए पर्यटकों से कोई भी फीस नही ली जाती है अगर आप बाला किला गुमने की सोच रहे है तो आप को बता दे कि अलवर में गर्मी में 50 सेल्सियस तक तापमान जा सकता हैं अक्टूबर के समय यहां की यात्रा करने के लिए सबसे ज्यादा सुखद है क्योकि इस दौरान मौसम काफी ठंडा होता है रक्छाबन्दन के दौरान यहां पर पतंग बाजी की प्रत्योगीता भी होती हैं इस दौरान अलवर का आसमान रंगीन नजर आता है 

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