जैसलमेर किला

                     जैसलमेर किला

जैसलमेर का क़िला भाट राजपुत शासक राव जेसाल द्वारा 1156 ई में बनाया गया था यह थाला स्थानीय लोगो द्वारा सोन का किला थार रेगिस्तान के सुनहरीय के बीच खडा है                                                                               जैसलमेर का किला 1500 फिट  लम्बा ओर 750 फिट  छोड़ा है यह एक पहाडी पर बनाया गया है रिसॉर्टस के नीस की ओर चार द्वार है जिनमे ओर चार प्रवेश द्वार है जिनमे से एक तोप से तोड़ रखा है गणेेश पोल, रंगपोल, भूतपोल ,हवपोल इस किले के प्रवेेेश द्वार है जो मुुर्ती कला सुुंनदरता ओर सुुंनदर डीजाइन के लिए जाना जााता है इस किले के देखने वाले स्थान राजमहल, जेेन ओर लक्ष्मीकात मंंदीर कई अन्य मंंदिरों ओर द्वार है जेसलमेर कीला मुस्लिम ओर राजपूत दोनों वस्तुक  सेलइयो समेेटे हुए है   यह किला त्रिकुटा पहाडी पर स्तथित है  है इस किले को राजस्थान के शानदार किलो में से एक होने का गौरव प्राप्त है    जैसलमेर किला भारत का एकमात्र किला है जिसमे लोग किले के परिसर में लोग रहते है और दुकानों को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए स्थापित किया गया है किले के परिक्षेत्र में एक होटल और एक पुरानी हवेली भी है जैसलमेर किले में दुनिया की सबसे बड़ी किलेबंदी की गई है यह किला शहर के बीचों बना हुआ है जेसलमेर किला इतना विशाल है कि वहाँ की पूरी जनता उस किले के अंदर रह सकती है आज भी वहाँ 4 हजार लोग रहते है                                                                         इस किले के बनने के पीछे एक रोचक कहानी जुड़ी हुई है असल मे उद्दीन मोहम्मद ने एक षड्यंत्र कर तहत राजा रावल जेसल पर हमला करते हुए जेसलमेर के किले को लूट लिया साथ ही वहाँ के निवासियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया ऐसे में राजा जेसल के सामने अपने लोगो के लिए नए किले को सत्यापित करने की एक बड़ी चुनोती थी इसके तहत राजा जेसल ने नए किले के लिए त्रिकुट पहाड़ को चुना ओर जेसलमेर नामक शहर की स्थापना की ओर उसे अपनी राजधानी बनाया।।                                                                 पाकिस्तान युद्ध मे भी इस किले की काफी खास भूमिका रहीं साथ वाले लोगो की सुरक्षा थी। की जिम्मेदारी सेना पर थी किंतु उन्हें कोई ठोस उपाय सूझ नहीं रहा था ऐसे में तय किया गया था कि जेसलमेर की पूरी आबादी को वहाँ के किले के अंदर भेजना उचित होगा मूल मे यह किला काफी मजबूत था इसलिए उस समय सबसे मजबूत जगह माना जाता 

   घोड़ा कीजे का काठ का,पग कीजे पाषण।
    बख्तर कीजे लोहे का,तब पहुँचे जैसाण।।

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