रणथम्भौर किला

रणथंभोर किला राजस्थान का बहुत ही शानदार किला है यह बारहवीं शताब्दी से अस्तित्व में है यह आर्कषक किला है रणथंभौर नेशनल पार्क से किले का दृश्य ओरर्ट्स से पार्क का दृश्य दोनों ही देखने लायक है। 
रणथंभौरर्ट्स को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है!
क्योकि यह किला राज्य का एक विशेष पहाड़ी किला है 
रणथंभोर नेशनल पार्क के घने जंगल कभी राजघराने का शिकारगाह थे 
रणथंभौर किला भरतीय राज्य का दर्जा के प्रमुख शहर सवाई माधोपुर के पास स्तिथ है 
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान उत्तर भारत का सबसे बड़ा वन्य जीव संरक्षण स्थल है 
इस किले का निर्माण कब हुआ इसके साक्ष्य उपलब्ध नहीं है लेकिन इतिहासकारों के अनुसार इस किले का निर्माण चौहान राजा रथंबन देव द्वारा 944 ईसवी में किया गया था इस किले का अधिकांश निर्माण कार्य चौहान राजाओ के शासनकाल मे ही हुआ!
हठीले हम्मीर की हट की गाथाये रणथंभोर के किले से जुड़ी हुई है यह गिरी दुर्ग हम्मीर की आन-बान ओर शान के लिए प्रसिद्ध है 

     "सिंह गमन सत्पुरुष वचन कदली फले एक बार" 
          "तिरता तेल हम्मीर हट चढ़े न दूजी बार"
रणथंभोर किला रणथंभोर नेशनल पार्क के बीच एक बड़ी सी चट्टान पर स्तिथ है इस किले में एक विशाल सुरक्षा दीवार ओर सात द्वार है जिसका नाम इस प्रकार है
1 नोलखा पोल
2 हाथी पोल
3 गणेश पोल
4 अंधेरी पोल
5 दिल्ली पोल
6 सेंट पोल
7 सूरज की पोल
किले में एक कचहरी भी स्तिथ है जिसे हमिरचढ़ी कहते है इस कचहरी में 3 कक्ष है जिसमें केंद्रीय कक्ष सबसे बड़ा है 
बरामदे की छत को दबाने देने के लिए संरचना में स्तम्भ खड़े है इस किले के अंदर हम्मीर शासन काल के दौरान बना एक महल भी स्तिथ है जिसको हम्मीर पैलेस ने कहा है। 
रणथंभोरर्ट्स में एक चौरासी स्तम्भ वाला एक बड़ा होल भी है जिसका उचाई 61 मीटर है इस महल को बादल महल के नाम से जाना जाता है। 
रणथंभोरर्ट्स के अंदर त्रिनेत्र गणेश मंदिर भी स्तिथ है 
जो यहां आने वाले भक्तों की ओर पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध है मान्यताओं की माने तो अगर कोई अपनी इच्छाओं को लेकर भगवान गणेश को पत्र लिख कर पाठ करता है तो उसकी इच्छाए जरूर पूरी होती है 

अपनी प्राकृतिक बनावट के कारण इस किले ने काफी प्रसिद्धि प्राप्त की है इस दुर्ग के प्राचीर से काफी दूर तक दुश्मनों पर नजर रखी जा सकती है 
इस ऐतिहासिक इमारत पर 1520 के दौरान मुगलो का अधिपत्य था जिसके बाद में सत्रहवीं शताब्दी में मुगलो ने यह किला जयपुर के महाराज को उपहार स्वरूप भेंट कर दिया।
विंध्य पत्रार के अरावली पहाड़ियों के बीच बना यह किला आसपास के मैदानों से लगभग 700 फिट की ऊँचाई के ऊपर है और लगभग 7 किलोमीटर के भौगोलिक क्षेत्र में फैला हुआ है। 
आजादी के बाद यह किला राज्य सरकार के अधीन आ गया जो साल 1964 से भारतीय बच्चों के सर्वेक्षण के नियंत्रण में है यहां एक पहाड़ी पर राजा हम्मीर के घोड़े के पद चिन्ह आज भी छपे हुए है ऐसा माना जाता है कि राजा को लेकर घोड़ों ने केवल 3 छलिंग में ही पूरी पहाड़ी को पार कर लिया गया था

रणथंभोर किला रेज में ऐतिहासिक घटनाओ में हमुरी का प्रतीक है जनश्रुति है कि प्रारम्भ में इस दुर्ग के स्थान के निकट पदमला नामक एक सरोवर था 
यह इसी नाम से आज भी किले के अंदर स्तिथ है!
यह किला रेटेड के उन पांच दुर्गों में आता है जिन्हें यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है
इस किले में सबसे खास है हमिर महल और राणा सांगा की रानी कर्मवती द्वारा शुरू की गई अधूरी छतरी को देखने रणथंभोर के किले को बख्तरबंद भी कहा जाता है

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